भारतीय परिवारों में शराब पीना क्यों बुरा माना जाता है?

भारतीय परिवारों में शराब पीना क्यों बुरा माना जाता है?
अग॰ 2 2023 प्रदीप विश्वकर्मा

सांस्कृतिक मूल्यांकन

अक्सर हमने देखा होगा कि भारतीय परिवारों में शराब पीना अस्वीकार्य माना जाता है। हिंदुस्तानी सभ्यता और संस्कृति की गहरी जड़ों में ही इसका उत्तर छिपा हुआ है। हमारे भारतीय समाज में बहुत सारे ऐसे रीति-रिवाज हैं जो हमें हमारे जीवन के हर पहलुओं में मार्गदर्शन करते हैं। इनमें से मुख्य एक यह भी है कि शराब पीना एक नगण्य आदत मानी जाती है, जो हमारे सामाजिक मानदंडों के खिलाफ है।

आरोग्य का स्वंय सही निर्णय

एक आरोग्य को ध्यान में रखते हुए भी, शराब पीने की आदत को नकारा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से कई प्रकार की बीमारिया हो सकती हैं। जैसे- लिवर से जुड़ी बीमारियाँ, मनोरोग, दिल की बीमारियाँ, और बहुत कुछ। इसलिए शराब का सेवन करने के लिए समझदारी से सोचना चाहिए।

उम्र और प्रतिष्ठा: स्थावर में एक निर्धारित कुर्सी

भारत एक परिवार-केंद्रित समाज है, जहां परिवार का प्रतिष्ठा और इज्जत सबसे मुख्य माने जाते हैं। इसलिए, यदि परिवार के भीतर कोई सदस्य शराब का सेवन करता है, तो इससे परिवार की प्रतिष्ठा और इज्जत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

धर्मों का विचार करना: कुछ बातें बेहतर हो सकती हैं

धर्म न केवल हमारा ईमान होता है, बल्कि वह हमारे जीवन की अविहित आधारभूमि भी होता है। शायद यही वजह है कि अनेक धर्मों ने शराब पीने के कुछ सख्त नियम बनाए हैं। उदाहरण स्वरूप, हमारे धैर्यवान जैन बन्धुओ ने तो शराब का सेवन आवश्यक ढंग से प्रतिषेध किया है।

सोचने की दिशा: एक नया दृष्टिकोण

समुदायिक दबाव, स्वास्थ्य, धर्म और परिवार की प्रतिष्ठा जैसे कारकों की बावजूद, आधुनिक युग में शराब के सेवन को एक व्यक्तिगत पसंद के रूप में देखा जाना चाहिए। जबकि यह एक प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है कि वह अपने जीवन के साथ क्या करता है, लेकिन यह उनकी जिम्मेदारी भी होती है कि वे स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने का प्रयास करें।